Monday, 13 June 2016

दानिश के दोहे

मन मन्दिर के देवता ,कह दो मन की बात |
कुछ साँसे अटकी हुई ,कब हो जाये रात ||

आँखों से करता रहा , जीवन भर बरसात |
मुझको अपना मान लो ,कह दो मन की बात ||

छुप छुप कर करता रहा ,जीवन भर आघात |
अंत समय है मीत अब ,कह दो मन की बात ||

मन में जितना ज़हर है ,सब कुछ उगलो तात |
हम पर कुछ विश्वास हो ,कह दो मन की बात ||

कह दो मन की बात को ,मत करना कुछ तोल |
मेरा तो कुछ भी नहीं , तुम तो हो अनमोल ||

अपने दिल के बोझ को ,हल्का कर लो यार |
कह दो मन की बात को तब उतरेगा भार ||

विजय मिश्र "दानिश"

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