मन मन्दिर के देवता ,कह दो मन की बात |
कुछ साँसे अटकी हुई ,कब हो जाये रात ||
आँखों से करता रहा , जीवन भर बरसात |
मुझको अपना मान लो ,कह दो मन की बात ||
छुप छुप कर करता रहा ,जीवन भर आघात |
अंत समय है मीत अब ,कह दो मन की बात ||
मन में जितना ज़हर है ,सब कुछ उगलो तात |
हम पर कुछ विश्वास हो ,कह दो मन की बात ||
कह दो मन की बात को ,मत करना कुछ तोल |
मेरा तो कुछ भी नहीं , तुम तो हो अनमोल ||
अपने दिल के बोझ को ,हल्का कर लो यार |
कह दो मन की बात को तब उतरेगा भार ||
विजय मिश्र "दानिश"
कुछ साँसे अटकी हुई ,कब हो जाये रात ||
आँखों से करता रहा , जीवन भर बरसात |
मुझको अपना मान लो ,कह दो मन की बात ||
छुप छुप कर करता रहा ,जीवन भर आघात |
अंत समय है मीत अब ,कह दो मन की बात ||
मन में जितना ज़हर है ,सब कुछ उगलो तात |
हम पर कुछ विश्वास हो ,कह दो मन की बात ||
कह दो मन की बात को ,मत करना कुछ तोल |
मेरा तो कुछ भी नहीं , तुम तो हो अनमोल ||
अपने दिल के बोझ को ,हल्का कर लो यार |
कह दो मन की बात को तब उतरेगा भार ||
विजय मिश्र "दानिश"
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