इस बार भी मुहब्बत सौ बार में मिली थी |
वो कौन सी खता थी जो प्यार में मिली थी ||
ये ज़िन्दगी तुम्हारी ये साँस भी तुम्हारी ,
बस दर्द की सजा ही उपहार में मिली थी ||
विजय मिश्र "दानिश"
16-06-2016
ये ज़िन्दगी तुम्हारी ये साँस भी तुम्हारी ,
बस दर्द की सजा ही उपहार में मिली थी ||
विजय मिश्र "दानिश"
16-06-2016
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