Thursday, 16 June 2016

मुक्तक

दिलों में आग का जलना ज़रूरी है ।
किसी की चाह में तपना ज़रूरी है ।।
तभी महकेगी अपने प्यार की दुनिया
गमों की भीड़ में हँसना ज़रूरी है ।।


विजय मिश्र "दानिश"

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